गौस और उसके वज़ीर

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*🥀 गौस और उसके वज़ीर 🥀*



🔮 गौस हर जमाना में होता है बगैर गौस के जमीन व आसमान काइम नहीं रह सकते हर गौस के दो वज़ीर होते हैं, गौस का लकब अब्दुल्लाह होता है और वज़ीर दस्त रास्त अब्दुर्रब
और वज़ीर दस्त चप अब्दुल-मलिक, इस सलतनत में वजीर दस्त चप वज़ीरे रास्त से आला होता है बखिलाफे सलतनत दुनिया इसलिए कि यह सलतनते कल्ब है और दिल जानिबे चप।

🔮गौसे अकबर व गौस हर गौस हुजूर सैय्यदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम हैं
सिद्दीके अकबर हुजूर के वजीर दस्त चप थे और फारूके आजम वजीर दस्त रास्त, फिर उम्मत में
सबसे पहले दरज-ए-गौसियत पर अमीरुल-मुमिनीन हज़रत अबू बकर सिद्दीक रजि अल्लाहु
तआला अन्हु मुम्ताज हुए और वजारत अमीरुल-मुमिनीन फारूके आजम व उस्मान गनी रज़ि अल्लाहु तआला अन्हुमा को अता हुई। उसके बाद अमीरुल मोमिनीन फ़ारूक़ आज़म रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु को गौसियत मरहमत हुई और उस्मान गनी रजि अल्लाहु तआला अन्हु व मौला अली कर्रमल्लाहु तआला वज्हहुल करीम वज़ीर हुए. फिर अमीरुल-मुमिनीन हजरत उसमान गनी रजि अल्लाहु तआला अन्हु को गौसियत इनायत हुई और मौला अली कर्रमल्लाहु तआला वज्हहुल करीम व इमाम हसन रजि अल्लाहु तआला अन्हु वज़ीर हुए फिर मौला अली को और इमामैन व मोहतरमैन रजि अल्लाहु तआला अन्हुमा वजीर हुए।

💫फिर इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से दरजा बदरजा इमाम हसन असकरी तक यह सब हजरात मुस्तकिल गौस हुए इमाम हसन असकरी के बाद हुजूर गौसे आजम रजि अल्लाहु तआला अन्हु तक जितने हज़रात हुए सब उनके नाइब हुए, उनके बाद सैय्यदना गौसे आजम
मुस्तकिल गौस हुजूर तन्हा गौसियते कुबरा के दर्जे पर फाइज हुए हुजूर गौसे आज़म भी हैं और सैय्यदुल-अफराद भी। हुजूर के बाद जितने हुए और जितने अब होंगे हज़रत इमाम मेहदी तक सब नाइब हुजूर गौसे आजम रजि अल्लाहु तआला अन्हु होंगे फिर इमाम मेंहदी रजि अल्लाहु तआला अन्हु को गौसियते कुबरा अता होगी।

✨गौस के इंतिकाल के बाद गौस की जगह इमामैन से गौस कर दिया जाता है और इमामैन की जगह औतादे अरबा से और औताद की जगह बदला से, बदला की जगह पर अब्दाल सबईन से और उनकी जगह तीन सौ नुकबा से, फिर औलिया से और औलिया की जगह आम्म-ए-मुमिनीन से कर दिया जाता है कभी बिला लिहाज़ तरतीब काफिर को मुसलमान करके बदल कर देते हैं उनका मरतबा अब्दाल से ज़्यादा है।

*📚 फैजाने आलाहज़रत सफ़ह,257*



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