मेरी निगाहें लौहे महफूज़ पर लगी रहती हैं 11
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*🥀 हमारे ग़ौसे आज़म رضی اللہ عنہ 🥀*
*पोस्ट 11*
*✏️मेरी निगाहें लौहे महफूज़ पर लगी रहती हैं :*
एक रिवायत में हज़रते अबू हफ़्स रहमतुल्लाहि तआला अलैह
फ़रमाते हैं कि हमारे सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला
अन्हु अपनी मजलिस में जमीन से हवा में चलते थे और
फ़रमाते थे कि आफ़ताब तुलू नहीं होता है जब तक कि मेरी
बारगाह में सलाम न भेजे। मेरे रब की इज्जत व जलाल की
कसम तमाम बदबख्त और नेकबख्त मेरे सामने किए जाते हैं।
मेरी निगाहें लौहे महफूज़ से लगी रहती हैं। परवरदगारे आलम
के इल्म व मुशाहदा के समुन्द्र में मैं गोता लगाता रहता हूँ, .
मखलूक पर मैं अल्लाह तआला की हुज्जत (दलील) हूँ और
अपने जद्दे करीम यानी हुजूर हलल्लाहु तआल्या अलैहि वसल्लम
का नाइबे ख़ास हूँ और ज़मीन पर हुजूर का वारिस हूँ।
*📚हमारे ग़ौसे आज़म सफा 209*
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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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