लोगों के दिल मेरे हाथ में हैं 16
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*🥀 हमारे ग़ौसे आज़म رضی اللہ عنہ 🥀*
*पोस्ट 16*
*✏️ लोगों के दिल मेरे हाथ में हैं*
🔮 हज़रते उमर बज्जाज़ रहमतुल्लाहि तआला अलैह फरमाते हैं कि मैं 15 जुमादल उख़रा हिजरी 556 को जुमा के दिन सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु के साथ जामे मस्जिद जा रहा था! रास्ते में किसी शख्स ने सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु को सलाम न किया! मैंने हैरत में डूब कर अपने दिल में कहा कि हर जुमा को तो लोगों की इतनी भीड़ होती है कि बड़ी मुश्किल से हम मस्जिद तक पहुँचते थे! मालूम नहीं आज क्या माजरा है कि कोई आप को सलाम तक नहीं करता!
🗣️ इस ख़याल का आना था कि सरकारे गौसे आजम रदियल्लाहु तआला अन्हु ने तबस्सुम फरमाते हुए मेरी जानिब देखा इसके साथ ही लोग कसरत से सलाम व मुसाफ़े को टूट पड़े और इसी हंगामे में मैं आप से दूर हो गया! मैं अपने दिल में सोचने लगा कि अपने लिए तो इस हालत से पहली ही वाली हालत अच्छी थी कि मैं सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु के करीब था!
🌹 यह ख्याल मेरे दिल में आते ही सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु ने फिर तबस्सुम फ़रमाते हुए मेरी जानिब देखा और इरशाद फ़रमाया ऐ उमर तुम्हीं ने तो इसकी ख़्वाहिश की थी क्या तुमको मालूम नहीं है कि लोगों के दिल मेरे हाथ में हैं अगर मैं चाहूँ तो उन्हें अपनी तरफ से फेर दूं और अगर चाहूँ तो उन्हें अपनी तरफ झुका लूँ! सुब्हान अल्लाह!
*(📚हमारे ग़ौसे आज़म सफ़ह,188)*
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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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