ख्वाब और बेदारी:-22

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*🥀 हमारे ग़ौसे आज़म رضی اللہ عنہ 🥀*



*पोस्ट 22*



*✏️ ख्वाब और बेदारी:-* 

हुज़र गौसे आज़म रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने फ़रमाया बेदारी के मुकाबले में जो होशयारी व आगाही का सबब है जिस शख्स ने नींद को इख़्तियार किया उसने नाकिस और अदना चीज़ को इख़्तियार किया,वह मुर्दों से जा मिला अच्छी मसलहतों से उसने ग़फ़लत बरती। नींद मौत की बहन है। इसी लिए अल्लाह तआला के लिए ख़्वाब जाएज़ नहीं माना गया। इसी तरह फिरिश्तों से भी नींद दूर है क्यूँकि वह अल्लाह के करीब हैं। 
इसी तरह जन्नतियों से भी नींद दूर कर दी गई। इसी लिए तमाम भलाईयों में बेहतर भलाई शब्बेदारी में है और तमाम बुराईयों में बदतर बुराई सो जाने और नेक कामों से ग़फ़लत बरतने में है। 
जो शख़्स अपने नफ्स की ख़्वाहिशात की बिना पर खाएगा पिएगा वही सोएगा। उसकी बहुत सी भलाईयाँ व नेकियाँ फ़ौत हो जायेंगी जिस शख़्स ने हराम ग़िज़ा में से थोड़ा सा भी खाया उसकी मिसाल उस आदमी जैसी है जिसने नफ्स की ख़्वाहिश से मुबाह (जाएंज़) चीज़ ज़्यादा खा ली क्यूँकि हराम ग़िज़ा ईमान के नूर को ढाक लेती है और दिल को काला कर देती है। जब ईमान ही ख़राब हो गया तो फिर न नमाज़ है न इबादत और न इख़्लास जिसने हुक्मे इलाही के साथ हलाल ग़िज़ा में से थोड़ा खाया और इसलिए खाया कि इबादत में ज़ौक़ और कुव्वत पाए उसे एक नूर मिला। हराम ग़िज़ा तारीकियों में से एक तारीकी है। हराम में न कोई नेकी हैं न भलाई है न ख़ैर फिर हुक्मे इलाही बगैर नफ्स की ख़्वाहिश से हलाल खाना भी हराम की तरह है। इसलिए कि यह भी नींद लाने वाला है। इसमें भी कोई भलाई और ख़ैर नहीं रह जाती।



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