सरकारे गौसे आज़म का इल्मे गैब09

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*🥀 हमारे ग़ौसे आज़म رضی اللہ عنہ 🥀*



*पोस्ट 9*



*_✏️सरकारे गौसे आज़म का इल्मे गैब_*

अल्लामा जौजी : सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला
अन्हु के इल्मी कमाल का यह हाल था कि जब बग़दाद में
आपकी मजलिसे वाज़ में साठ साठ और सत्तर सत्तर हज़ार
इन्सानों का मजमा होने लगा तो बाज़ आलिमों को हसद होने
लगा कि एक अजमी शख्स को बगदाद में इस क़द्र मकबूलियत
क्यूँकर हासिल हो गई। चुनांचे हाफ़िज़ अबुल अब्बास अहमद
इब्ने अहमद बग़दादी और अल्लामा हाफ़िज़ अब्दुल रहमान इब्ने
जौज़ी जो दोनों अपने वक्त में इल्म के समुन्द्र और हदीसों के
पहाड़ जाने जाते थे सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला
अन्हु के वाज़ की मजलिस में इम्तिहान की ग़रज़ से ये दोनों
हज़रात आए और एक दूसरे के आमने सामने बैठ गए। जब
सरकारे गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु ने तकरीर शुरू
फरमाई तो एक आयते करीमा की तफ़सीर बयान फरमाने लगे।
हुजूर गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु ने पहली तफ़सीर
सुनाई तो इन दोनों आलिमों ने एक दूसरे की तरफ़ देखा और
तसदीक करते हुए सर हिला दिया। इसी तरह ग्याहर 'तफसीरों
तक तो दोनों हज़रात एक दूसरे की तरफ़ देख देख कर सर हिलाते और तसदीक करते रहे मगर जब सरकारे गौसे आज़म
रदियल्लाहु तआला अन्हु ने उसी आयते करीमा की बारहवीं
तफसीर बयान फ़रमाई तो उस तफसीर से यह दोनों आलिमे
दीन नावाकिफ थे इसलिए आंखें फाड़ फाड़ कर दोनों हज़रात
हुजूर गौसे आज़म का चेहरए अनवर देखने लगे मगर सरकारे
गौसे आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु की इल्मी शान का यह
आलम था कि उसी आयते करीमा की चालीस तफ़सीरें
मुसलसल बयान फ़रमाते चले गए और ये दोनों हज़रात हैरत
में डूबे हुए सुनते और सर धुनते रहे फिर आखिर में हुजूर गौसे
आज़म ने फरमाया कि अब हम काल से हाल की तरफ़
पलटे। यह फ़रमाया और एक मरतबा जो बलन्द आवाज़ से
कलिमए तय्यबा का ज़ोरदार नारा लगाया तो सारी मजलिस में
एक जोशे कैफ़ियत तारी हो गई और बेचैनी पैदा हो गई और
हज़रत अल्लामा इब्ने जौज़ी रदियल्लाहु तआला अन्हु ने तो
जोशे हाल में अपने कपड़े तक फाड़ डाले।

*📚हमारे ग़ौसे आज़म सफा 176-177*



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